India Defense Budget in Last 5 Years: भारत की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए पिछले पांच साल में रक्षा बजट में लगातार बढ़ोतरी हुई है। सीमा पर चीन और पाकिस्तान से जुड़ी चुनौतियां, समुद्री सुरक्षा, आधुनिक हथियारों की जरूरत और सेना के तेजी से आधुनिकीकरण ने सरकार का फोकस रक्षा क्षेत्र पर बढ़ाया है। India Defense Budget in Last 5 Years को देखें तो वित्त वर्ष 2021-22 में करीब ₹4.78 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में यह लगभग ₹6.81 लाख करोड़ पहुंच गया है।
India Defense Budget in Last 5 Years
पिछले पांच वित्तीय वर्षों के आंकड़े देखें तो तस्वीर काफी साफ है:
| वित्त वर्ष | कुल रक्षा बजट |
|---|---|
| 2021-22 | ₹4,78,195.62 करोड़ |
| 2022-23 | ₹5,25,166.15 करोड़ |
| 2023-24 | ₹5,93,537.64 करोड़ |
| 2024-25 | ₹6,21,940.85 करोड़ |
| 2025-26 | लगभग ₹6,81,210 करोड़ |
यानी 2021-22 से 2025-26 के बीच रक्षा बजट में करीब ₹2.03 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई। यह लगभग 42 प्रतिशत की नाममात्र बढ़ोतरी है। हालांकि 2025-26 का आंकड़ा बजट अनुमान है, इसलिए अंतिम खर्च इससे अलग हो सकता है।
2021-22 में रक्षा बजट कितना था?

वित्त वर्ष 2021-22 में रक्षा मंत्रालय को ₹4,78,195.62 करोड़ दिए गए थे। उस समय देश कोरोना महामारी से भी जूझ रहा था और पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा तनाव भी बड़ी चुनौती था।
इस बजट में करीब ₹1,35,060 करोड़ पूंजीगत खर्च के लिए रखे गए थे। इस पैसे से नए हथियार, सैन्य उपकरण और दूसरी जरूरी रक्षा प्रणालियों की खरीद की जाती है। वहीं रक्षा पेंशन के लिए ₹1,15,850 करोड़ का प्रावधान था।
2022-23 में बढ़कर ₹5.25 लाख करोड़
अगले साल रक्षा बजट बढ़कर ₹5,25,166.15 करोड़ हो गया। यह पिछले साल की तुलना में करीब 9.82 प्रतिशत ज्यादा था।
इस साल पूंजीगत खर्च लगभग ₹1.52 लाख करोड़ रहा। खास बात यह थी कि पूंजीगत खरीद बजट का 68 प्रतिशत घरेलू उद्योग से खरीद के लिए तय किया गया। इसका मकसद भारत में ही हथियार बनाने और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करना था।
2023-24 में बजट ₹5.93 लाख करोड़
वित्त वर्ष 2023-24 में रक्षा बजट ₹5,93,537.64 करोड़ पहुंच गया। इसमें करीब ₹1,62,600 करोड़ पूंजीगत खर्च के लिए रखा गया था।
सरकार ने इस दौरान आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल, युद्धपोत, रडार, ड्रोन और दूसरी सैन्य तकनीक पर ध्यान बढ़ाया। साथ ही भारतीय कंपनियों और घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की कोशिश जारी रही।
2024-25 में ₹6.21 लाख करोड़
2024-25 में रक्षा मंत्रालय का बजट ₹6,21,940.85 करोड़ रहा। इसमें करीब ₹1,72,000 करोड़ पूंजीगत खर्च के लिए रखा गया।
इस राशि का इस्तेमाल सेना के आधुनिकीकरण और नई रक्षा प्रणालियों की खरीद में किया जाना था। वहीं करीब ₹1,41,205 करोड़ रक्षा पेंशन के लिए रखे गए।
2025-26 में पहली बार करीब ₹6.81 लाख करोड़
India Defense Budget in Last 5 Years की सबसे बड़ी तस्वीर 2025-26 के बजट में दिखाई देती है। इस साल रक्षा मंत्रालय के लिए करीब ₹6,81,210 करोड़ का बजट अनुमान रखा गया। पूंजीगत खर्च बढ़कर ₹1,80,000 करोड़ हो गया।
इस बार ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष निगरानी और लंबी दूरी की मिसाइल जैसी तकनीकों पर खास जोर दिया गया।
रक्षा बजट का पूरा पैसा हथियारों पर नहीं लगता
यह समझना जरूरी है कि कुल रक्षा बजट का मतलब केवल हथियार खरीदने का पैसा नहीं है। इसमें सैनिकों और कर्मचारियों की सैलरी, भत्ते, ईंधन, ट्रेनिंग, सैन्य ठिकानों का रखरखाव, हथियारों की मरम्मत और सीमा पर तैनाती का खर्च भी शामिल होता है।
इसके अलावा रक्षा पेंशन भी बजट का बड़ा हिस्सा है। सैनिकों की पेंशन, महंगाई राहत और OROP जैसी योजनाओं के कारण इस मद में लगातार बड़ा खर्च होता है।
आत्मनिर्भर रक्षा पर बढ़ा जोर
पिछले पांच साल में सरकार ने आत्मनिर्भर रक्षा पर काफी ध्यान दिया है। तेजस, आकाश मिसाइल, पिनाका रॉकेट, ब्रह्मोस और कई स्वदेशी हथियार प्रणालियां इसी दिशा का हिस्सा हैं।
इसका मकसद भारत को सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश बनाने के बजाय एक बड़ा रक्षा निर्माता बनाना है। इससे रोजगार, तकनीक और घरेलू कंपनियों को भी फायदा हो सकता है।
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क्या बढ़ता बजट पर्याप्त है?
बजट बढ़ने के बावजूद चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। भारत को चीन और पाकिस्तान की सीमाओं के साथ-साथ हिंद महासागर में भी सुरक्षा मजबूत रखनी है। पुराने सैन्य उपकरणों को बदलना और नई तकनीक अपनाना भी जरूरी है।
इसलिए India Defense Budget in Last 5 Years के आंकड़े बताते हैं कि सरकार ने रक्षा पर खर्च लगातार बढ़ाया है, लेकिन असली सवाल यह है कि बढ़ी हुई राशि को कितनी तेजी से आधुनिक हथियारों, बेहतर तकनीक, सैनिकों की तैयारी और घरेलू रक्षा उत्पादन में बदला जाता है।
नोट: 2025-26 का आंकड़ा बजट अनुमान है। वास्तविक खर्च बाद में अलग हो सकता है।



