राजधानी दिल्ली में विद्यार्थियों पर हुई पुलिस कार्रवाई और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक पारा गरमा गया है। जंतर-मंतर से संसद मार्ग की ओर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में अब पूरा विपक्ष एकजुट होकर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी में है। इस घटनाक्रम के विरोध स्वरूप विपक्षी दलों ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक एक विशाल विरोध मार्च निकालने का फैसला किया है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में अपने हक और बेहतर भविष्य के लिए आवाज उठा रहे निर्दोष विद्यार्थियों पर बल प्रयोग पूरी तरह से अनुचित है। इस मुद्दे को लेकर संसद के दोनों सदनों में हंगामे के आसार हैं।
खड़गे के कक्ष में बनी रणनीति: विपक्षी दलों की बैठक में बड़ा फैसला
इस पूरे मामले को लेकर राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद स्थित कक्ष में विपक्षी दलों के ‘फ्लोर लीडर्स’ की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में संसद के भीतर और बाहर सरकार को घेरने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में शामिल सभी घटक दलों ने एक स्वर में सहमति जताई कि छात्रों के दमन के खिलाफ केवल संसद के अंदर ही नहीं, बल्कि सड़कों पर भी विरोध दर्ज कराया जाना आवश्यक है। बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया कि संसद की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसद एकजुट होकर संसद भवन परिसर से राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च करेंगे और महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपेंगे।
राहुल गांधी के नेतृत्व में स्पीकर से मिला प्रतिनिधिमंडल
घटना की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद अरविंद सावंत, और कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल सहित कई प्रमुख नेता मौजूद थे।
मुलाकात के दौरान विपक्षी नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की कि छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज और देश भर में परीक्षाओं में आ रही गड़बड़ियों के मुद्दे पर संसद में तत्काल और विस्तृत चर्चा कराई जाए।
अगर युवाओं के भविष्य पर बात न हो, तो संसद किस काम की?
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि विपक्ष की मांग बिल्कुल स्पष्ट और जायज है। जब देश के छात्र अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए जायज सवाल पूछते हैं, तो उन पर लाठियां बरसाई जाती हैं।
राहुल गांधी ने कहा, “अगर देश की संसद भारत के युवाओं के भविष्य और उनकी समस्याओं पर चर्चा नहीं कर सकती, तो वह किस काम की? विपक्ष इस मुद्दे को दबाने नहीं देगा। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि विद्यार्थियों की आवाज संसद के पटल से लेकर सड़कों तक पूरी मजबूती के साथ गूंजे।
दिल्ली पुलिस की कड़ी कार्रवाई: 5 FIR दर्ज, 250 वीडियो की जांच
दूसरी ओर, सोमवार को जंतर-मंतर से शुरू हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प और हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने भी सख्त रुख अपनाया है। पुलिस ने इस मामले में दंगा भड़काने, आर्म्स एक्ट और सरकारी काम में बाधा डालने सहित विभिन्न धाराओं के तहत कुल 5 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि वे इस बात की गहनता से जांच कर रहे हैं कि कहीं यह प्रदर्शन राजधानी की कानून-व्यवस्था को अस्थिर करने की किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा तो नहीं था। उपद्रवियों और हिंसा फैलाने वालों की पहचान के लिए पुलिस लगभग 250 डिजिटल वीडियो फुटेज की बारीकी से जांच कर रही है।
लाठीचार्ज में कई घायल, सुरक्षा पर उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज में कई छात्र-छात्राएं और प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। सोशल मीडिया पर इस घटना के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें पुलिस बल का प्रयोग करते दिख रही है। विपक्षी नेताओं और छात्र संगठनों का आरोप है कि पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी बर्बरता की है। नेताओं का कहना है कि यदि किसी छात्र को गंभीर चोट आती है या कोई अनहोनी होती है, तो इसके लिए दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार होगी।
गरमाती राजनीति और आगे का रास्ता
छात्रों के आंदोलन पर हुई इस पुलिस कार्रवाई ने देश की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। एक तरफ जहां दिल्ली पुलिस इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया कदम बता रही है और विधिक कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे युवाओं की आवाज दबाने का प्रयास मान रहा है।
संसद से राष्ट्रपति भवन तक प्रस्तावित विपक्षी मार्च से यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ेगा। अब देखना यह होगा कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार होती है या विपक्षी दलों का यह आंदोलन और अधिक आक्रामक रूप अख्तियार करता है।
