
पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों से लोग परेशान हैं। वहीं, EV यानी Electric Vehicle की तरफ लोगों का झुकाव तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन नई EV कार खरीदना हर किसी के लिए आसान नहीं है। इसी बीच एक नया ट्रेंड सामने आया है पुरानी पेट्रोल कार को इलेक्ट्रिक कार में बदलना।
आजकल कई लोग यह जानना चाहते हैं कि Cost of converting an old petrol car to EV in India आखिर कितना है और क्या यह वाकई फायदेमंद है।

पुरानी पेट्रोल कार को EV में बदलना क्या होता है?
पुरानी पेट्रोल कार को EV में बदलने की प्रक्रिया को retrofitting कहा जाता है। इसमें कार का पेट्रोल इंजन, फ्यूल टैंक और एग्जॉस्ट सिस्टम हटाकर उसकी जगह इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी और कंट्रोल यूनिट लगाई जाती है।
बाहर से कार वही रहती है, लेकिन अंदर से वह पूरी तरह इलेक्ट्रिक बन जाती है। सरल शब्दों में कहें तो आपकी पुरानी कार बिना पेट्रोल के चलने लगती है।
Cost of Converting An Old Petrol Car to EV in India
भारत में Cost of converting an old petrol car to EV in India आमतौर पर 3 लाख से 10 लाख रुपये के बीच होती है। यह खर्च कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे:
- कार का साइज
- बैटरी की क्षमता
- DC या AC किट
- रेंज (एक चार्ज में कितनी दूरी)
छोटी कारों के लिए खर्च कम होता है, जबकि बड़ी कारों में खर्च ज्यादा आता है।
लागत का आसान ब्रेकडाउन (Cost Breakdown)
EV कन्वर्ज़न में सबसे ज्यादा पैसा बैटरी पर खर्च होता है।
- बैटरी पैक: ₹2 से ₹4 लाख
- इलेक्ट्रिक मोटर और कंट्रोलर: ₹50,000 से ₹1.5 लाख
- वायरिंग और चार्जर: ₹30,000 से ₹70,000
- लेबर और फिटिंग: ₹50,000 से ₹1 लाख
अगर आप छोटी कार जैसे Alto, WagonR या Maruti 800 को EV बनाते हैं, तो कुल खर्च 3–5 लाख रुपये में हो सकता है। AC किट और ज्यादा रेंज वाली बैटरी लेने पर खर्च 7–10 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
भारत में EV कन्वर्ज़न किट देने वाली कंपनियां
भारत में अब कई कंपनियां यह सुविधा दे रही हैं। कुछ नाम इस प्रकार हैं:
- doReal Motors: Maruti 800, Alto, WagonR के लिए ₹3–9 लाख
- Loop Moto: WagonR, Swift के लिए ₹3–5 लाख, रेंज लगभग 180 km
- E-Trio: Alto, WagonR, Dzire के लिए ₹4 लाख से शुरू, ARAI approved
- Bharat Kit: ₹5 लाख, करीब 80 km रेंज
ये सेवाएं दिल्ली, पुणे, हैदराबाद और कुछ अन्य बड़े शहरों में उपलब्ध हैं।
कानूनी प्रक्रिया क्या है? (Legal Process)
यह सिर्फ किट लगवाने का मामला नहीं है। इसमें कुछ कानूनी स्टेप्स भी जरूरी हैं।
- पुरानी कार का इंजन हटाने के बाद बदलाव की जानकारी RTO को देनी होती है।
- केवल ARAI approved किट ही मान्य होती है।
- EV कन्वर्ज़न के बाद नई RC बनती है, जिसमें फ्यूल टाइप “Electric” लिखा होता है।
दिल्ली जैसे शहरों में 15 साल पुरानी पेट्रोल और 10 साल पुरानी डीजल कारों को EV में बदलने की अनुमति है, जो लोगों के लिए राहत की बात है।
सब्सिडी और बचत का हिसाब
फिलहाल केंद्र सरकार की FAME-II सब्सिडी सीधे retrofitting पर ज्यादा नहीं मिलती। लेकिन कुछ राज्य EV conversion को बढ़ावा देने की योजना बना रहे हैं।
जहां तक बचत की बात है:
- पेट्रोल खर्च में सालाना 80,000 से 1 लाख रुपये तक की बचत
- मेंटेनेंस खर्च बहुत कम
- 4–5 साल में कन्वर्ज़न की लागत निकल सकती है
यही वजह है कि Cost of converting an old petrol car to EV in India अब लोगों को वाजिब लगने लगा है।
पब्लिक राय और एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
कई EV एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर कार की बॉडी और हालत अच्छी है, तो EV कन्वर्ज़न एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है। हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि नई EV लेना ज्यादा सुरक्षित है, क्योंकि उसमें warranty और बेहतर टेक्नोलॉजी मिलती है।
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निष्कर्ष
अगर आपकी पुरानी पेट्रोल कार अच्छी हालत में है और आप पेट्रोल खर्च से छुटकारा चाहते हैं, तो EV कन्वर्ज़न एक अच्छा विकल्प हो सकता है। Cost of converting an old petrol car to EV in India जरूर ज्यादा लग सकता है, लेकिन लंबे समय में यह खर्च वसूल हो जाता है।
आने वाले समय में अगर सरकार और सब्सिडी देती है, तो यह विकल्प और भी लोकप्रिय हो सकता है।