Traditional Wrestling Events UP: उत्तर प्रदेश में दंगल सिर्फ खेल नहीं है, यह लोगों की भावनाओं से जुड़ी परंपरा है। मिट्टी के अखाड़े, ढोल-नगाड़े, जोश से भरे पहलवान और गांव की भीड़ – ये सब मिलकर यूपी की एक ऐसी पहचान बनाते हैं जो आज भी उतनी ही मजबूत है जितनी सदियों पहले थी।
इसी वजह से इन दिनों Traditional Wrestling Events UP लगातार चर्चा में हैं, क्योंकि राज्य के कई जिलों में पुराने दंगल फिर बड़ी संख्या में आयोजित होने लगे हैं।
यूपी में पहलवानी की शुरुआत बहुत पुरानी मानी जाती है। मुगल काल से लेकर आज तक दंगल गांवों की संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। नाग पंचमी, कार्तिक पूर्णिमा, स्वतंत्रता दिवस जैसे त्योहारों पर जगह-जगह दंगल लगाए जाते हैं। अखाड़ा संस्कृति की यही खासियत है कि यहां सिर्फ ताकत ही नहीं, अनुशासन, विनम्रता और भाईचारा भी सिखाया जाता है।

पहलवानों की दिनचर्या
पुराने अखाड़ों में पहलवान सुबह 3 बजे उठते हैं।
- दंड-बैठक: 2,000 से 4,000 तक
- दौड़ और तैराकी
- भारी पत्थर उठाना
- 3 घंटे तक लगातार कुश्ती अभ्यास
खलीफा यानी रेफरी दंगल को नियंत्रित करता है और विजेता को गुर्ज या नकद पुरस्कार दिया जाता है। कानपुर, बुलंदशहर, गोरखपुर, आगरा जैसे जिलों में कभी 60–70 अखाड़े होते थे, आज कम बचे हैं, लेकिन जो बचे हैं, वे परंपरा को जीवित रखे हुए हैं – जैसे कानपुर का राष्ट्रीय अखाड़ा और चंदू पहलवान अखाड़ा।
Traditional Wrestling Events UP, यूपी में हुए प्रमुख दंगल
पिछले एक साल में यूपी के कई जिलों में पारंपरिक दंगलों ने फिर से रौनक बढ़ाई है।
कानपुर – नाग पंचमी दंगल (जुलाई 2025)
दिबियापुर गांव में लाट मंदिर परिसर में महिला और पुरुष पहलवानों ने शानदार मुकाबले किए। पहली बार इतनी बड़ी संख्या में महिला पहलवान उतरीं, जिसे देखकर दर्शक बहुत खुश हुए।
भरथना, इटावा – कार्तिक पूर्णिमा दंगल
नहर पुल के पास विशाल मेला लगा। यहां रजत (नगला हीरे) ने राधे (औरैया) को शानदार मुकाबले में हराया। दीपांशु, राजा सैफई जैसे युवा पहलवान भी विजेता बने।
बुलंदशहर – शहीद आईपीएस नरेंद्र सिंह स्मृति दंगल
अक्टूबर 2025 में आयोजित इस दंगल के विजेता को 1.11 लाख रुपये और बुलेट बाइक दी गई। भीड़ इतनी अधिक थी कि आसपास के गांवों में पार्किंग की जगह ही नहीं मिली।
भदोही – स्वतंत्रता दिवस दंगल (15 अगस्त 2025)
कांती रामपुर में लगा बड़ा अखाड़ा ऐतिहासिक रहा। हजारों लोग सुबह से शाम तक बैठे रहे और स्थानीय पहलवानों का हौसला बढ़ाते रहे।
हमीरपुर – नवंबर 2025 दंगल
बसवारी गांव में देशभर के पहलवान उतरे। यहां स्थानीय नेताओं ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया। इस दंगल ने गांव का माहौल पूरी तरह बदल दिया।
मथुरा – सरकारी दंगल (दिसंबर 2025)
नगर निगम ने 5 दिसंबर को आधिकारिक दंगल आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे पारंपरिक खेल को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
Organised Events 2025–2026
सिर्फ पारंपरिक दंगल ही नहीं, बल्कि संगठित कुश्ती इवेंट भी यूपी में तेजी पकड़ रहे हैं।
- U17 स्टेट चैंपियनशिप (5–7 अप्रैल 2025, बागपत)
- रणभूमि 1.0 – केडी सिंह बाबू स्टेडियम, लखनऊ (24 जनवरी 2026)
- राष्ट्रीय कॉम्बैट कुश्ती चैंपियनशिप (गोरखपुर, सितंबर 2025)
- 19 राज्यों से 414 खिलाड़ी आए, जिनमें 100 महिला खिलाड़ी थीं।
इन बड़े आयोजनों ने युवाओं में उत्साह बढ़ाया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे इवेंट्स ओलंपिक स्तर के पहलवान तैयार कर सकते हैं।
युवाओं और जनता की प्रतिक्रिया
ग्रामीण इलाकों में दंगल देखने भारी भीड़ उमड़ती है। परिवार अपने बच्चों को पहलवानों की मेहनत देखकर प्रेरित करते हैं। कई लोग कहते हैं कि आधुनिक खेलों के बीच भी दंगल की परंपरा ने अपनी ताकत नहीं खोई है।
सोशल मीडिया पर भी Traditional Wrestling Events UP ट्रेंड कर रहा है। लोग वीडियो शेयर कर रहे हैं और पुराने समय की यादें ताजा कर रहे हैं।
चुनौतियां और भविष्य
हालांकि अखाड़ों की संख्या पहले की तुलना में कम हो गई है। जहां पहले एक अखाड़े में 100 पहलवान होते थे, अब कभी-कभी सिर्फ 20 ही रह जाते हैं। लेकिन सरकार नए स्टेडियम बना रही है और ग्रामीण खेलों को बढ़ावा दे रही है।
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विशेषज्ञों के अनुसार अगर दंगलों को पर्यटन और सांस्कृतिक खेल के रूप में बढ़ावा दिया जाए, तो यह भविष्य में यूपी की बड़ी पहचान बन सकते हैं।
