भारत में पिकलबॉल की लोकप्रियता 2025 में तेजी से बढ़ रही है। पार्क, स्पोर्ट्स क्लब और हाउसिंग सोसाइटी में लोग बड़े उत्साह के साथ इस खेल को अपना रहे हैं। नए खिलाड़ियों में सबसे बड़ा सवाल यही होता है Pickleball Rules for Singles vs Doubles Explained यानी सिंगल्स और डबल्स के नियम कैसे अलग हैं और खेलते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
पिकलबॉल एक ऐसा खेल है जो टेनिस, बैडमिंटन और टेबल टेनिस तीनों का मजेदार मिश्रण है। इसका कोर्ट छोटा होता है, रैकेट हल्का होता है, और मैच तेज़ स्पीड में चलते हैं। इसलिए शुरुआती खिलाड़ी इसे तुरंत सीख लेते हैं।

दोनों फॉर्मेट में कुछ बेसिक नियम एक जैसे
सिंगल्स और डबल्स दोनों में कुछ कॉमन रूल्स होते हैं, जिन्हें हर खिलाड़ी को समझना जरूरी है।
- मैच आमतौर पर 11 पॉइंट्स तक खेला जाता है, पर 2 पॉइंट का अंतर जरूरी है।
- सिर्फ सर्विंग टीम ही पॉइंट बना सकती है।
- सर्व हमेशा अंडरहैंड और डायगोनल क्रॉसकोर्ट होता है।
- डबल बाउंस रूल लागू है, सर्व के बाद बॉल दोनों साइड एक-एक बार जमीन पर गिरेगी।
- नेट के पास 7 फीट का नॉन-वॉली ज़ोन (Kitchen) होता है जहां बिना बाउंस के शॉट नहीं मार सकते।
ये बेसिक रूल्स पूरे खेल की नींव हैं, और इनसे खेल साफ, तेज़ और रोमांचक बनता है।
सिंगल्स नियम: एक खिलाड़ी, पूरा कोर्ट और लगातार मूवमेंट
सिंगल्स पिकलबॉल में खिलाड़ी को पूरा कोर्ट अपने दम पर कवर करना होता है। इसलिए यहां स्टैमिना, स्पीड और लंबी रैलियों को संभालने की क्षमता ज्यादा जरूरी है।
सिंगल्स के मुख्य नियम:
- हर पॉइंट के बाद सर्वर राइट या लेफ्ट साइड बदलता है।
- अगर सर्वर का स्कोर ईवन (सम) है तो सर्व राइट साइड से होता है, और ऑड (विषम) होने पर लेफ्ट साइड से।
- सिंगल्स में सिर्फ एक सर्वर होता है, यानी कोई दूसरा सर्वर नहीं होता, जैसा डबल्स में होता है।
- गेम में लॉब, पासिंग शॉट और लंबी रेंज की हिटिंग ज्यादा देखने को मिलती है।
उदाहरण के लिए, अगर स्कोर 2-1 है, और सर्वर ने पॉइंट जीता, तो उसका स्कोर 3 हो जाएगा और वह लेफ्ट साइड पर शिफ्ट होकर अगला सर्व करेगा।
सिंगल्स उन खिलाड़ियों के लिए है जिन्हें रनिंग और एग्रेसिव गेम पसंद है।
डबल्स नियम: टीमवर्क, कम्युनिकेशन और नेट गेम की जंग
भारत में डबल्स सबसे ज्यादा खेला जाने वाला फॉर्मेट है, क्योंकि इसमें मज़ा भी दोगुना और रणनीति भी मजबूत होती है।
डबल्स के मुख्य नियम:
- डबल्स में सर्व हमेशा दो खिलाड़ियों के बीच घूमता है (सिवाय पहली सर्विंग के, जहां सिर्फ एक ही सर्वर होता है)।
- स्कोर कॉल तीन नंबर्स में किया जाता है:
(सर्विंग टीम का स्कोर) – (रिसीविंग टीम का स्कोर) – (सर्वर नंबर) - पॉइंट जीतने पर सिर्फ सर्वर साइड स्विच करता है, पार्टनर वही रहता है।
- रिसीविंग टीम कभी साइड नहीं बदलती।
- गेम में दिंक (हल्की गेंद), थर्ड शॉट ड्रॉप और नेट कंट्रोल बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डबल्स पिकलबॉल में टीमवर्क ही सबसे बड़ा हथियार होता है। कम्युनिकेशन कमजोर हो तो अच्छे खिलाड़ी भी मैच हार सकते हैं।
Pickleball Rules for Singles vs Doubles Explained
| अंतर | सिंगल्स | डबल्स |
|---|---|---|
| सर्व पैटर्न | हर पॉइंट पर साइड स्विच | टीम के दोनों खिलाड़ी सर्व करते हैं |
| कोर्ट कवरेज | पूरा कोर्ट अकेले | पार्टनर के साथ बंटा हुआ |
| गेम का स्टाइल | लंबी रैली, लॉब, पासिंग | छोटी रैली, दिंक, वॉली |
| स्कोर कॉल | दो नंबर्स | तीन नंबर्स (सर्वर नंबर सहित) |
| फिजिकल डिमांड | ज्यादा स्टैमिना | तेज़ रिफ्लेक्स और टीमवर्क |
इस तुलना से साफ है कि सिंगल्स ज्यादा शारीरिक खेल है, जबकि डबल्स स्मार्ट रणनीति और तालमेल पर चलता है।
भारत में बढ़ती लोकप्रियता और खिलाड़ियों की राय
देश में पिकलबॉल की लोकप्रियता दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और अहमदाबाद जैसे शहरों में बहुत बढ़ रही है। युवा खिलाड़ियों का कहना है कि यह टेनिस से आसान और बैडमिंटन से ज्यादा मजेदार है। कई सोसायटी में अब डेडिकेटेड पिकलबॉल कोर्ट बन रहे हैं।
Read These Also:
- How To Join Local Kabaddi League? 2025 में ट्रायल, रजिस्ट्रेशन और तैयारी की पूरी जानकारी
- AI Tools For Content Creators Hindi: हिंदी Content Creators के लिए यह हैं सबसे बेस्ट AI Tools!
कोचों का मानना है कि नए खिलाड़ी डबल्स से शुरुआत करें। इससे रूल्स आसानी से समझ आते हैं और गेम पर कंट्रोल जल्दी बनता है।
