कबड्डी भारत का एक ऐसा खेल है जिसमें ताकत, स्टैमिना, तेज़ी और दिमाग – चारों का बराबर इस्तेमाल होता है। लेकिन हर खिलाड़ी के पास रोज़ मैदान या जिम की सुविधा नहीं होती। इसी वजह से इन दिनों Home Workout Kabaddi Players Hindi इंटरनेट पर तेजी से सर्च किया जा रहा है, क्योंकि खिलाड़ी और युवा जानना चाहते हैं कि क्या घर पर ही प्रो-लेवल की फिटनेस बनाई जा सकती है।
जवाब है – हाँ, बिल्कुल। घर पर 45–60 मिनट की सही ट्रेनिंग से रेडर और डिफेंडर दोनों अपनी फिटनेस को काफी बेहतर कर सकते हैं।
घर पर वर्कआउट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए जिम, खास उपकरण या बड़ी जगह की जरूरत नहीं होती। बस आपका मन, अनुशासन और 1 घंटे का समय काफी है। देश के कई राज्य-स्तरीय और प्रो-कबड्डी खिलाड़ियों ने भी यह माना है कि घर पर बॉडीवेट वर्कआउट से उनकी ताकत और सहनशक्ति बढ़ी है।

Home Workout Kabaddi Players Hindi, वार्म-अप सबसे जरूरी
कबड्डी में चोटें आम होती हैं, इसलिए वार्म-अप सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। हर खिलाड़ी सुबह 5 बजे उठकर सबसे पहले 10–15 मिनट वार्म-अप करे। इसमें शामिल हों:
- जंपिंग जैक्स: 30 सेकंड × 3 सेट
- हाई नीज़: 30 सेकंड × 3 सेट
- बर्पीज़ (Burpees): 10–15 रेप्स
- हल्की स्ट्रेचिंग: पैर फैलाकर तो-टच, आर्म सर्कल
यह रूटीन शरीर को लचीला बनाता है, मसल्स को गर्म करता है और चोट से बचाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, वार्म-अप करने से खिलाड़ी की प्रदर्शन क्षमता 20–25% बढ़ती है।
लोअर बॉडी वर्कआउट
कबड्डी में रेडर जितना तेज़ और ताकतवर होगा, उतना ही सफल होगा। पैरों की ताकत रेड की नींव होती है। घर पर ये एक्सरसाइज आसानी से की जा सकती हैं:
- स्क्वाट्स: 15–20 रेप्स × 3 सेट
- जंप स्क्वाट्स: 10–15 रेप्स × 3 सेट
- लंजेस: हर पैर पर 10 रेप्स × 3 सेट
- कैल्फ रेज: 20 रेप्स × 3 सेट
इनसे मुकाबले के समय आगे बढ़ने, मोड़ने और अचानक स्पीड पकड़ने की क्षमता बढ़ती है। कई प्रो खिलाड़ियों का कहना है कि सिर्फ स्क्वाट्स और लंजेस से ही उनकी रेडिंग पावर में बड़ा सुधार आया।
ऊपरी शरीर और कोर स्ट्रेंथ
डिफेंडर के लिए ऊपरी शरीर का मजबूत होना बहुत जरूरी है। घर पर इन सरल एक्सरसाइज से टैकल स्ट्रेंथ बढ़ती है:
- पुश-अप्स: 10–15 × 3 सेट
- प्लैंक: 30–60 सेकंड × 3
- रशियन ट्विस्ट: 20 रेप्स × 3
- बर्पीज़: 10 × 3
कोर मसल्स मजबूत होने से खिलाड़ी विरोधी को पकड़ने और गिराने में सफल रहता है। प्लैंक और पुश-अप्स खास तौर पर डिफेंडर्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
स्पीड और एजिलिटी ड्रिल्स
कई खिलाड़ियों को लगता है कि स्पीड ट्रेनिंग के लिए बड़ा मैदान चाहिए। लेकिन घर पर भी यह किया जा सकता है:
- शॉर्ट स्प्रिंट (घर में ही छोटी दूरी पर): 10–15 बर्स्ट
- फुटवर्क लैडर (फर्श पर चॉक से लाइन बनाकर): 5–10 मिनट
- एंकल होल्ड प्रैक्टिस: दीवार पकड़कर पैर पकड़ने की स्किल
- टो-टच ड्रिल: 30 सेकंड × 5 राउंड
ये ड्रिल्स रेडर को तेजी देती हैं और डिफेंडर को एंगल पकड़ने में मदद करती हैं।
साप्ताहिक पूरा प्लान, खिलाड़ी इसे फॉलो कर सकते हैं
- सोम, बुध, शुक्रवार: लोअर बॉडी + स्पीड
- मंगल, गुरुवार, शनिवार: ऊपरी शरीर + कोर
- रविवार: पूरा रेस्ट
हर दिन 2000 मीटर “स्टेशनरी रनिंग” यानी जगह पर खड़े होकर दौड़ना भी जोड़ें।
डाइट और रिकवरी
कबड्डी खिलाड़ी की ताकत सिर्फ वर्कआउट से नहीं आती, बल्कि सही खाने और नींद से भी मिलती है।
- प्रोटीन: दूध, अंडे, पनीर, दाल
- कार्बोहाइड्रेट: रोटी, चावल
- पानी: रोज़ 4 लीटर
- नींद: कम से कम 8 घंटे
- रिकवरी: योगा, गहरी सांस, हल्की वॉक
यदि खिलाड़ी यह सब 6 महीने तक लगातार करें, तो न सिर्फ स्टैमिना बढ़ता है, बल्कि वजन भी कंट्रोल में रहता है।
लाभ और सावधानियां
विशेषज्ञों का कहना है कि घर पर किया गया वर्कआउट कबड्डी खिलाड़ी की फिटनेस में 30–40% तक सुधार ला सकता है। लेकिन सही फॉर्म जरूरी है। ओवरट्रेनिंग न करें और शुरुआत में डॉक्टर की सलाह लेना अच्छा रहता है।
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कई National Level खिलाड़ी बताते हैं कि लॉकडाउन के समय घर पर ट्रेनिंग ही उनका सबसे बड़ा सहारा बनी थी।
