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14 मिनट की वो शॉर्ट फिल्म जिसने बिना भूत दिखाए दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए, बूढ़ा पति और जवान पत्नी का खौफनाक खेल

कोलकाता: फिल्म की दुनिया में अक्सर हम बड़ी बजट और लंबी अवधि वाली फिल्मों को ज्यादा तवज्जो देते हैं, लेकिन कई बार छोटे कैनवास पर ऐसी कहानियां रच दी जाती हैं, जो दर्शकों की सोच से भी कहीं आगे निकल जाती हैं. आज हम आपको एक ऐसी ही बंगाली शॉर्ट फिल्म से रूबरू करा रहे हैं, जिसने सिर्फ 14 मिनट 10 सेकंड में सस्पेंस, क्राइम और थ्रिलर का ऐसा ताना-बाना बुना कि दर्शक अंत तक हिल भी नहीं पाए. हम बात कर रहे हैं साल 2015 में रिलीज़ हुई चर्चित शॉर्ट फिल्म अहिल्या की.

कहानी का सस्पेंस मिसिंग रिपोर्ट और अजीब खिलौने

अहिल्या की कहानी एक साधारण-सी गुमशुदगी की रिपोर्ट से शुरू होती है. जांच का जिम्मा एक तेज-तर्रार पुलिस ऑफिसर (टोटा रॉय चौधरी) को मिलता है. केस की तह तक पहुंचने के लिए वह एक घर में दाखिल होते हैं, जहां उनकी मुलाकात एक बेहद आकर्षक और जवान महिला, अहिल्या (राधिका आप्टे) से होती है.

पहली नज़र में सब कुछ सामान्य लगता है, लेकिन इंस्पेक्टर को घर के माहौल में कुछ ‘गड़बड़’ महसूस होती है. उनकी नज़र कोने में रखे कुछ अजीब, इंसानी शक्ल वाले खिलौनों पर पड़ती है. वह जैसे ही इन खिलौनों के बारे में पूछताछ शुरू करते हैं, तभी कहानी में नया मोड़ आता है.

बूढ़ा पति और जवान पत्नी जब किरदार बदलते हैं कहानी

अहिल्या के पति एक मशहूर आर्टिस्ट गौतम साधु (सौमित्र चटर्जी) की एंट्री होती है. वेटरन एक्टर सौमित्र चटर्जी को देखकर इंस्पेक्टर हैरान रह जाता है. जहां राधिका आप्टे अपनी जवानी और चंचलता से भरी दिखती हैं, वहीं उनके पति गौतम साधु उम्रदराज़ और बुज़ुर्ग हैं. दोनों की उम्र में यह ज़बरदस्त अंतर तुरंत एक अजीबोगरीब विरोधाभास पैदा करता है.
यहां से फिल्म की कहानी एक नए ट्रैक पर चली जाती है. इंस्पेक्टर के मन में बूढ़े पति और जवान पत्नी के रिश्ते को लेकर संदेह गहराता जाता है. यह साधारण घर अचानक एक खौफनाक रहस्य का केंद्र बन जाता है.

बिना भूत का असली डर क्लाइमेक्स में चौंकाने वाला सच

अहिल्या की सबसे बड़ी ताकत इसका लाजवाब क्लाइमेक्स है. निर्देशक ने कहानी को जिस तरह से बुना है, वह दर्शकों को बिना किसी भूत या पैरानॉर्मल एक्टिविटी के भी असली डर का एहसास करवाता है. यह डर मानवीय लालच छल और एक भयावह खेल से जुड़ा है, जिसे यह बुज़ुर्ग पति और जवान पत्नी मिलकर अंजाम देते हैं.

यह खौफनाक खेल इतना वी भत्स और चौंकाने वाला है कि दर्शकों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं. यह दर्शाता है कि सबसे बड़ा डर अक्सर हमारे अपने जैसे मनुष्यों के भीतर छिपा होता है, न कि किसी परलौकिक शक्ति में.

एक्सपर्ट एनालिसिस और रेटिंग

फिल्म का निर्देशन सुजॉय घोष ने किया है, जो कहानी जैसी सफल थ्रिलर फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं. सिर्फ 14 मिनट की यह शॉर्ट फिल्म दिखाती है कि एक दमदार कहानी और सधी हुई एक्टिंग के दम पर बड़े से बड़े बजट की फिल्मों को टक्कर दी जा सकती है.

  • अभिनय: सौमित्र चटर्जी और राधिका आप्टे के बीच की केमिस्ट्री और विरोधाभास पर्दे पर बेहतरीन ढंग से उभर कर आता है. टोटा रॉय चौधरी भी एक संजीदा पुलिस ऑफिसर के रोल में जमे हैं.
  • अवधि: सिर्फ 14 मिनट 10 सेकंड की अवधि इसे आज के शॉर्ट अटेंशन स्पैन वाले दर्शकों के लिए एकदम परफेक्ट बनाती है.
  • रेटिंग: इस फिल्म को IMDb पर 10 में से शानदार 7.9 की रेटिंग मिली है, जो इसकी गुणवत्ता का प्रमाण है.

निष्कर्ष अहिल्या सिर्फ एक शॉर्ट फिल्म नहीं है, बल्कि एक सिनेमाई अनुभव है जो यह साबित करता है कि अच्छी कहानी को किसी बड़े बजट की ज़रूरत नहीं होती. अगर आप थ्रिलर और सस्पेंस के शौकीन हैं और बिना किसी हॉरर एलिमेंट के डर का अनुभव करना चाहते हैं, तो Royal Stag Barrel Select Shorts के यूट्यूब चैनल पर मुफ्त में उपलब्ध यह फिल्म आपके लिए एक मस्ट वॉच है.

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